
माफी पाए खातिर
सार बात
हम सब अपन जीवन म गलती करथन। का हमन ल कर्म के तीखे दंश के इंतजार करना चाहिए, या फिर ईश्वरीय क्षमा जैसे कोई चीज घलो हे? ए पुस्तिका यीशु के उड़ाऊ पुत्र के दृष्टांत के स्वदेशी संस्करण बताथे, जेमा दिखाया गे हे कि कइसे सृष्टिकर्ता परमेश्वर हर पापी मन ल खुले हाथ से स्वागत करथे अऊ एक पल म जीवन भर के पाप ल क्षमा करथे।
परकार
Tract
प्रकाशक
Sharing Hope Publications
उपलब्धी में
22 भाषा
पन्ना
6
प्रताप एक अमिर बाप के औलाद रहिथे। ओमन बड़े घर में रहत रहिन घर में काम करेबर कमियां राखेरहीन। प्रताप करा पिन्धे ओढ़े बर बढ़ीया से बढ़ीया कपड़ा, खाना अउ पढ़ाई लिखाई बर बढ़ीया सुबिरथा रहिस, ओ हर जानत रहिसे ओकर दाई- ददा मन ओला अब्बड़ मया करथे, सबले ज्यादा ददा हर ओला मया करथे।
लेकिन जिसने हि प्रताप के उमर ह बढ़ते गीस, ओकर में बदलाव आना शुरू होगे, अब ओला पहले के कछू भी जिनीस हर नइच सुहावत रहिसे। ददा के घर अउ ददा के बात चित सबों जिनिस हर बंधना बरोबर लागत रहिसे। प्रताप ये सबसे छुटकारा पाना चाहत रहिस।
एक दिन प्रताप हर अपन के दई ल बोलथे जाके ददा ल मना ले। जब ओहर येला बताथे कि ओकरकाय इच्छा हे, येहर डर के मारे पिछू घूंचक जाथे। लेकिन ओहर जिद करके येला पूछे बर मना लेथे। ओमा कई दिन लाग गे, लेकिनआखिर मं ओहर रोवत वापिस आ जाथे।
«ओहर करदिही» एहर बोलथे, अब ओकर बेटा हर दिखाउल नयि मिलय। ओहर अपन के जमीन जायदाद के आधा ल बेचके तोला तोर हिस्सा ल दे दी ही। लेकिन का खातिर मोर बेटा? «का बर?»
प्रताप ल थोड़ा सा दुःख लागिस, लेकिन ओहर मन ही मन उचकत भी रहिथे। ओकर इच्छा के अनुसार काम बनगे। ओहर अपन के बांटा ल ददा के संपत्ति से पा जही ओकर बाद अपन के इच्छा के अनुसार जिवन ल बिताही।
जंगली जिनगी
प्रताप हर बड़े शहर मं चलदिस। ओहर एकठन बहुत ही महंगा घर ल किराया में ले थे ओकर बाद नवा संग साथी बनाय बर लग जाथे। तुरंत बाद ओहर पार्टी सबमें मस्ती मज़ा करने लगिस जहां सबों किसम के अमिर अउ नाम चिन लोगन मन आवत रहिन। ओहर गाड़ी खरीद लेथे सुंदर महिला मन के साथ रात बिताथे, अउ महंगा से महंगा रेस्तरां में खाना खाथे। ओकर पास सब कुछ हे जेकर ओला इच्छा रहिस।
लेकिन कुछ दिन बाद, प्रताप के पुरा पैसा खतम हो जाथे। बेशरम हो के अपन के कुछ नवा संगवारी मन से फोन करके थोड़ा पैसा उधार मांगथे, लेकिन अचानक ओमन जवाब देना बंद कर देथे। ओहर अब अपनेच के खरचा ल भी उठा नयि पात रहिस। आखिर में मकान मालिक ओला निकाल दे थे। पैसा भी नयि हे अउर संगवारी भी नयि हे, अब ओहर काहां जाही?
प्रताप निराश हताश होके, शहर में भटकत फिरत रहिथे। जिसने हि सूरज हर डुबत जथे, ओकर मन में डर हर समात जाते। ओहर कोन ठीना सुते बर पाहि? ओहर का खाहि? प्रताप अपन के जिंदगी में पहली बार गली मुहल्ले में सुता थे, खाली पेट भूख से गुड़ गुड़ावाथ हे।
दुःखी हावय
कई दिन ल, प्रताप हर शहर में नोकरी पाए खातिर भटकत रहिस। ओहर फटहा हालत म दिखत रहिसे गली मुहल्ला म सुतय, ई पाय के ओला कोई काम नयि देत रहिसे केवल खंडहर रेस्तरां के काम मिलय। प्रताप ल घंटों काम करना पड़िस, रथिया के खाना ल डोहारय टेबल सबो ल पोंछय। ओहर भूखन मरत रहिसे अउ थक हार गे रहिसे। ओहर सोंचथे ए कैसे हो सकथे कि ओहर, एक जमीनदार के बेटा होके, खाना परोसा थे! जब ओ रेस्तरां म रातकन के आखिरी खाना बचे रहिथे, ओहर रसोइया में जाके बर्तन धोए लगिस। ओहर देखथे एक थाली म आधा खाए रोटी कचरा के तिर मं हावय। ओला अतका भूख लागत रहिथे कि ओहर ओ रोटी ल खाय बर चले जाथे।
मोर संग काबर गलत होगिस? ओहर स्वयं कोसत रहिथे। मोर ददा घर के सबों नोक्कर मन ल भरपेट खाय बर मिलथे ओकर बाद भी खाना बांच जाथे। अउ मैं ई जगा म गन्दा फेंकाय खाना ल खाय बर मरजांथा!
ओहर बर्तन के ठऊर मं एक टक देखत रहिथे अउ बनेच बेरा ल गुनत रहिथे।
मोला पता चल गे मोला काय करना हे, ओहर मन बनालेथे। मैं अपन ददा ठीना वापिस चले जाहूं अउ ओला बोलहूं, «ददा, मोर से तोर बिरोध म अउ परेमेश्वर के बिरोध म पाप होगिस»। अब मैं तोर बेटा नयि बन सकां। «मोला भी नौकर बनाके रख लें।»
एक भी बर्तन ल नयि धोईस, प्रताप हर रेस्तरां ल छोड़ के अपन घर डहर चल पड़िस।
वापस घर जाय के बेरा
प्रताप कई सारा बिचार मनमें लावत रहिथे जैसेने ओहर घर डाहर जावत रहिथे। ओखर दादा हर कैसन प्रतिक्रिया दिखाईस जब ओहर ओला देखिस? ओकर जाय से पहले काय बोलहूं कहिके अभ्यास करत रहिथे, लेकिन ओला कछु भी नि सुहावत रहिसे। आखिर म, एक लंबी यात्रा करे के बाद, ओहर अपन ददा के घर ल दूर से देख लेथे। अब ओहर डाहर मं धीरे चलत रहिथे।
अचानक, ओहर एक आवाज सुनथे। ओकर ददा हर, वैसे तो बहुत शांत अउर स्वाभिमानी ये, कुदत घर से बाहरआगे। ओहर प्रताप करा पहुंच जाथे अउर ओला जोर से पोटार लेथे। प्रताप ल ऐसन लगथे कि ओकर दिल टुट गे।
ददा ओहर सुसकत, “मोर से पाप होगिसे तोर बिरोध म अउ परेमेश्वर के बिरोध म”। “मैं तोर बेटा कहाय के लायक नि होंय।”
ददा ओकना ऐसन पहूंचथे लगथे कि ओहर एक भी बात ल नयि सुनें हे। आंसू ढरगे अउ ओकर गाल डहर से बहत रहिथे। घर के नौकर सबो मन हल्ला गुल्ला सुन के दौड़त बाहर आगिन।
“तुरंत!” ओकर ददा हर ओमन ल कहिस। ओकर कमरा ल तियार करा! ओला तियार करेबर नावां कपड़ा ओंढा लेके आवा! एक जेवनार के तैयारी करा, हमन सबो कोई मिलके आनंद मनाबो! ए मोर बेटा हे - “ओहर मरगे रहिसे पर अब जिंदा हावय; ओहर गंवा के रहिसे लेकिन अब मिलगिसे!”
माफी पाए खातिर
ए कहानी हर प्रभु यीशु मसीह के समय बोले किस्सा के आधार पर समझाए गे हे किस तरह हमन ल सिरस्टी कर्ता से माफी मिल सकथे। जब हमन से जिंदगानी में कछु भूल हो जाथे-चाहे कतकों बड़का भी- तभो ले हमन परमेश्वर ठीना आ सकथन जैसन कि प्रताप हर अपन ददा ठीना वापिस लौट जाथे। हमन ल कोई भी उट-पटांग रिवाज अउ बलिदान के जरुरत नयि पड़य। अपन बांह ल पसार के परमेश्वर हर हमन के डाहर देखत रहिथे। जे कर हृदय में बदलाव आ जाथे ओला हि ओहर ज्यादा महत्व देथे। हमन ल नम्र होके अपन के पाप ल मानेबर पड़ ही, अउ क्षमा मांगना पड़ ही। का आप मन परमेश्वर के स्वर्गीय अदभुत क्षमा ल अनुभव करना चाहत हाव? आज आप मन धुले जा सकथव, इसि बखत, हर पाप अपराध से जेला कर चुके हव। आप मन प्रार्थना ल ऐसने करिहा:
प्यारे परमेश्वर, मैं दिल के गहराई से सबों पाप से माफी मांगाथंव। कृपया मोला माफ़ी दे दव अउ मोला सबों अशुद्धि से धो दव काबर कि सबों खातिर प्रभु यीशु मसीह बलिदान होके भेंट चढ़ गे। मोला अंदर से एक नवा व्यक्ति बना दव। आमीन।
यदि आप मन अउर अधिक प्रभु यीशु मसीह के सबों शिक्षा से ज्ञान पाना चाहत हाव, कृपया हमन से सम्पर्क करव यही पन्ना के पीछे म जानकारी बर विवरण छापे गए हे।
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